Old Pension Scheme: राज्यों की वित्तीय हालत पर पुरानी पेंशन स्कीम से कितना पड़ेगा असर?  

हमारे देश में ऐसे बहुत से लोग हैं जो सरकारी नौकरी करते हैं अथवा सरकारी नौकरी कर चुके हैं। किंतु जब तक वे सेवा प्रदान करने हेतु सक्षम रहे तब तक ही उन्हें उनकी पगार मिलती रही। यही नजारा प्राइवेट सेक्टर में भी है। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से जानेंगे की राज्यों की वित्तीय हालत पर पुरानी पेंशन स्कीम से कितना असर पड़ेगा?  

जहां पर जब तक कर्मचारी अथवा एंप्लॉय सेवा प्रदान करने हेतु सक्षम है तब तक ही उसे महीने की पगार प्रदान की जाती है।

लेकिन सेवानिवृत्त होने के पश्चात क्या?

तब क्या मनुष्य की जरूरते समाप्त हो जाती है या फिर यह कहे कि उस समय उन्हें वित्तीय सहायता की आवश्यकता नहीं होती है? तो इसका उत्तर है नहीं। सेवानिवृत्त हो जाने के बाद भी लोगों को कुछ कामों के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है।

अब जो लोग पहले से ही शेविंग कर चुके हैं उनके लिए तो यह सब कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन उनका क्या जिन्होंने यह उपाय भी नहीं प्रयोग किया हो। ऐसे लोगों के लिए 2004 के जनवरी महीने में केंद्र सरकार ने इस वर्ष के पश्चात आने वाले सभी कर्मचारियों के वास्ते नेशनल पेंशन स्कीम को लोगों के सामने लाया है।

एनपीएस अर्थात नेशनल पेंशन स्कीम के आने के पश्चात आहिस्ता आहिस्ता सभी राज्यों ने भी इस पेंशन व्यवस्था को अपने राज्यों में लागू कर लिया था। हमारे देश के अर्थशास्त्रियों ने इस बात की वार्निंग दे रखी है कि यदि NPS यानी कि पुरानी पेंशन योजना में वापस लौटती है तो वित्त के लिए विनाशकारी परिणाम यह ला सकता है।

सरकार कर्मचारियों के लिए तो पेंशन की व्यवस्था बहुत पहले से करके रखी है. इसके साथ ही पेंशन को लेकर और भी कई योजनाओं का क्रियान्वयन शुरू कर रही है. जिसमें वृद्धा, विधवा पेंशन जैसी योजनाएं शामिल है. अब सवाल उठता है की पत्नी को कैसे मिलेंगे 3000 रु का लाभ तो इसको जानने के लिए इससे जुड़ी हर पहलु को समझने की जरुरत है.

क्यों है ओल्ड पेंशन स्कीम चर्चा में:

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि पिछले कुछ महीनों से ओल्ड पेंशन स्कीम का मुद्दा बहुत ही चर्चित रहा है। हमारे देश के बहुत से राज्य अपने कर्मचारियों को पेंशन प्रदान करने हेतु इसी स्कीम का अनुसरण वर्तमान में कर रहे हैं।

जो भी राज्य इस स्कीम का अनुसरण कर रहे हैं उन पर अब कैग की दृष्टि बनी हुई है।हमारा देश भारत का संवैधानिक ऑडिटर नियंत्रण तथा महालेखा परीक्षक पुरानी पेंशन स्कीम से होने वाले राज्य के ऊपर वित्तीय बोझ का पता लगाने में जुटा हुआ है।

ये जानना भी आपके लिए बहुत जरुरी है की सरकार क्यों जनधन खाता धारकों को दे रही है 3000रु. पीएम योगी श्रम योजना के अंतर्गत हर उम्र के व्यक्तियों के लिए अलग-अलग राशि अपने बैंक में जमा कराना होता है. जिससे आपको रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलेगा l

CAG ने हमारे देश के प्राकृतिक संसाधनों के व्यापक खाते के ऊपर भी काम करना प्रारंभ कर दिया है। यह नीति सभी निर्माताओं को उक्त उल्लेखित संसाधनों के प्रयोग की योजना बनाने में सहायता प्रदान करेगा।

जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 में सेवा में आने वाले प्रत्येक कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन स्कीम का श्रीगणेश किया है।  NPS के द्वारा स्कीम लागू करने के पश्चात देश के विभिन्न राज्यों ने भी आहिस्ता आहिस्ता इस स्कीम की तरफ अपने रुझान को दिखाया है।

देश के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक जीसी मुरमू ने ईटी को यह बात बताई है कि,”हम यह देखने के लिए मॉडलिंग एक्सरसाइज कर रहे हैं कि इसका सरकार की वित्तीय स्थिति पर क्या असर पड़ेगा।” 

पुरानी पेंशन स्कीम बेहतर है:

CAG की एक डिवीजन लंबी समयावधि और लघु कालीन असर का पता लगाने के वास्ते पुरानी पेंशन स्कीम के ऊपर वापस लौटने से जुड़े हुए भिन्न-भिन्न परिणामों को देख रहा है।

हमारे देश के अर्थशास्त्रियों ने इस बात की वार्निंग दे दी है कि यदि एनपीएस से पुरानी पेंशन स्कीम का वापस जाना राज्य के वित्त के वास्ते विनाशकारी फल प्रदान कर सकता है।

आखिर क्या है पुरानी पेंशन स्कीम में?

१. इस स्कीम के तहत कर्मचारियों के रिटायरमेंट के वक्त कर्मचारी के वेतन की आधी धनराशि पेंशन की राशि के रूप में प्रदान की जाती हैं।

२. यदि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन प्रदान किया जाता है तो उसके लिए उस कर्मचारी के वेतन में से धनराशि को काटा नहीं जाता है।

३. कर्मचारियों को भुगतान सरकार के ट्रेजेडी के द्वारा होता है।

४. सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों की मृत्यु के पश्चात भी उनके परिजनों को पेंशन की राशि प्रदान की जाती है।

५. जनरल प्रोविडेंट फंड अर्थात GPF का प्रावधान है।

६. 6 महीनों के बाद मिलने वाले बीए का प्रावधान सम्मिलित है।

नई पेंशन स्कीम की मुख्य बातें:

1. कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डी ए का 10% हिस्सा काटकर पेंशन के लिए रखा जाता है।

2. एनपीएस शेयर मार्केट पर फूली बेस्ट है। यह बात इस को असुरक्षित बना देती है।

3. नई पेंशन स्कीम में 6 महीने बाद मिलने वाले डीए का प्रावधान नहीं है।

4. इस स्कीम के तहत रिटायरमेंट के पश्चात निश्चित पेंशन की गारंटी बिल्कुल भी नहीं है।

5. इसमें टैक्स का भी प्रावधान लागू होता है।

6. रिटायरमेंट के पश्चात पेंशन पाना है तो उसके लिए उन्हें एनपीएस फंड का 40% निवेश करना पड़ता है।

नई पेंशन स्कीम की आवश्यकता क्यों?

हमारा देश भारत बहुत बड़ा है। जहां पर करोड़ों की संख्या में लोग निवास करते हैं और ऐसे  में बहुत से ऐसे लोग हैं जो नौकरी करते हैं। एक बार सेवानिवृत्त हो जाने के पश्चात उन्हें जीवन भर तक पेंशन प्रदान किया जाता है। इसका सीधा असर हमारे देश के बजट पर पड़ता है।

हमारे देश के राष्ट्रीय कोष का अधिकतम धन पेंशन भोगियों में खर्च हो जाता है। जिससे कि हमारे देश के विकास वाले कामों में बाध्यता उत्पन्न होती है। इसी बात को मद्देनजर रखते हुए हमारी देश की केंद्रीय सरकार ने यह बात स्पष्ट कर दी है.

अब पुरानी पेंशन स्कीम को हटाकर नई पेंशन स्कीम को लागू किया जाएगा। जिससे कि सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों के ऊपर कम खर्च करके देश की उन्नति में अधिक निवेश किया जा सके।

निष्कर्ष:

इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको पुराने पेंशन स्कीम के विषय में विस्तार पूर्वक बताया है। हमने पुरानी पेंशन स्कीम के अतिरिक्त नई पेंशन स्कीम के बारे में भी स्पष्टता और सटीकता पूर्वक बताया है। हम उम्मीद करते हैं कि हमारा यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा।

यदि आपके मन में हमारे लिए कोई सवाल है तो आप इसे कमेंट के जरिए हम से पूछ सकते हैं। इसके अतिरिक्त यदि आप हमें कोई सुझाव देना चाहते हैं तो यह भी आप हमें बेझिझक दे सकते हैं। इस आर्टिकल को अधिक से अधिक लोगों को जरुर शेयर करें। धन्यवाद।

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